Tuesday, April 28, 2020

हम


इतिहास बना दें ऐसे, जैसे कर दिखलाया कोरोना।
अपने भीतर जितने दुश्मन, है उनका अब नहीं होना।।

झूठ, कपट, आलस्य त्यागकर, हम अधिकारिक विजयी बनें।
किस पथ पर कितना चलना है, ये भी अब हम स्वयं चुनें।।

मंजिल तक जो रस्ता जाता, हम उस रस्ते के हो लें।
अपने हक का हर एक मंज़र, खुद से लूट सके तो लें।।

जो कहता है क्या, क्यों, कितना, खुद प्रतिकारित हो जाएगा।
खुद को, खुद से, खुद में देखें, सब  परकाशित हो जाएगा।।

जाना वहां, जहां जाने को निकले कल से कल खातिर।
कर दिखलाना, है हमको कुछ भाषण में तो जग माहिर।।

(एन. के. जैन) 

Monday, March 30, 2020

आदत

दोस्तों आज हम बात करेंगे की आदत क्या है?

आदत कोई वस्तु , भावना, एहसास , नहीं है आदत महज एक क्रिया है जो कि हमारे मन और मस्तिष्क द्वारा दोहराई जाती है और इसके दोहराने का कारण किसी भी आदत से मिलने वाली संतुष्टि है, आदत सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही तरह की हो सकती  हैं, कुछ आदतें जबरन बनाई जाती हैं कुछ जाने अनजाने में बन जाती हैं। 

आदतों का प्रभाव 

हम किसी भी प्रकार की क्रिया को जब अंजाम देते हैं तो उसका कोई ना कोई प्रभाव हमारे मन, मस्तिष्क या शरीर पर अवश्य होता है, सकारात्मक आदतें  हमारे मन, मस्तिष्क व शरीर पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं, व नकारात्मक आदतें नकारात्मक प्रभाव छोड़ती है। 

आदतों का आचरण 

सकारात्मक आदतों का आचरण में पालन हम मन, मस्तिष्क और शरीर की संतुष्टि के लिए तो करते ही हैं कभी कभी इसीलिए भी करते हैं क्योंकि उनके सकारात्मक प्रभाव हमारे लिए उपयोगी हैं। किंतु नकारात्मक आदतों का आचरण हम सिर्फ संतुष्टि प्राप्त करने के लिए करते हैं और किसी भी नकारात्मक आदत द्वारा प्राप्त की गई संतुष्टि क्षणिक ही होती, जबकि सकारात्मक आदतों द्वारा प्राप्त की गई संतुष्टि या लाभ हमारे लिए जीवन भर उपयोगी होता है। 

आदतें कैसे बदले? 
मस्तिष्क की एकाग्रता, संयम और दृढ़ निश्चय ही हमें सकारात्मक आदत को अपने आचरण में लाने के लिए प्रतिबाधित कर सकता है, जबकि नकारात्मक आदतें बिना अथक प्रयासों के भी हमारे आचरण में कब आ जाती है हमको इसका आभास भी नहीं होता। इसलिए जरूरी ये है कि अपने घर में, ऑफिस में या कहीं भी सुसंगति का ही आचरण कीजिए ऐसा करने से ही सकारात्मक आदतों का अवतरण हो सकेगा, सकारात्मक आदतों से  मन मस्तिष्क और शरीर की संतुष्टि, प्रसन्नता व अन्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं जो कि जीवन भर हमारे लिए उपयोगी बने रहेंगे और उनका दुष्प्रभाव हमारे जीवन व व्यक्तित्व पर नहीं पड़ेगा। 

Sunday, March 29, 2020

मोबाइल का इस्तेमाल कब न करें ?

दोस्तों हम सभी यह जानते हैं कि आजकल मोबाइल हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा हो गया है मोबाइल ने हि हमारे केलकुलेटर, घड़ी, कैलेंडर, नोटपैड , पेश आदि आदि अन्य चीजों की जगह ले ली है और आजकल गेम भी मोबाइल में हि  खेले जा सकते हैं तो यह कहना उचित होगा कि 15 से 20 क्रियाएं जोकि हम फिजिकली करते थे वह मोबाइल में ही सिमट कर रह गई है, जिसके कारण हमारे शरीर की एक्सरसाइज उंगलियों की एक्सरसाइज काफी कम हो गई है तथा आंखों पर ज्यादा ज़ोर पड़ता है और मानसिक तनाव बढ़ता है, आइए जानते हैं मोबाइल का इस्तेमाल कब न करें ! 
(1) प्रातः काल उठते ही हम सबसे पहले मोबाइल उठाते हैं और रात भर के मैसेजेस रीड करना शुरू कर देते हैं वह भी सिर्फ एक प्लेटफार्म पर नहीं व्हाट्सएप, फेसबुक ,इंस्टाग्राम, स्नैपचैट आदि आदि एक के बाद एक ऐप खोलते हैं उनको चेक करते हैं जबकि हमें ऐसा नहीं करना चाहिए ऐसा करने से हमारा सुबह का समय तो नष्ट होता ही है मानसिक तनाव भी बढ़ता है और हमारी आंखों के लिए भी यह बेहद नुकसानदायक है। 

(2) दोस्तों नहाने के तुरंत बाद भी हमको मोबाइल चेक नहीं करना चाहिए क्योंकि नहाने के बाद हमारे शरीर में बेहद स्फूर्तिर्ति होती है उस समय तैयार होने के बाद हम जिस काम को करते हैं वह ज्यादा एकाग्रता से कर पाते हैं उस एकाग्रता को मोबाइल में नष्ट ना करें।

(3) ड्राइव करते समय फोन का इस्तेमाल ना करें और बाइक राइडिंग के समय भी फोन का इस्तेमाल ना करें। ऐसा करने से हमारी एकाग्रता भंग होती है और हम स्वयं को और अपने साथ अन्य को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

(4) लेक्चर सुनते समय या ऑफिस, कॉलेज, स्कूल की किसी बेहद जरूरी मीटिंग के समय भी मोबाइल का इस्तेमाल ना करें ऐसा करने से हमारा ध्यान भटकता है और महत्वपूर्ण बातें सुन नहीं पाते हैं।

(5) योग, व्यायाम एवं जिम या किसी भी प्रकार की फिजिकल एक्टिविटी करते समय मोबाइल का उपयोग ना करना ही बेहतर है क्योंकि हम जिस कार्य को करते हैं उसमें पूरी तरह से हमारा ध्यान और मन लगना चाहिए तभी उसका पूरा लाभ हमारे शरीर को हमारे दिमाग को और हमारे मन को प्राप्त होता है।

(6) भोजन करते समय ना करें मोबाइल का इस्तेमाल ऐसा करने से आपका ध्यान अन्य बातों में उलझ जाता है और हम भोजन को एकाग्रता से नहीं कर पाते हैं जो कि शरीर के लिए सही नहीं है।

(7) सबसे अहम बात यही है कि जरूरत पड़ने पर ही मोबाइल का उपयोग करें अन्यथा किसी और गतिविधि के दौरान इसका इस्तेमाल करना हमारे  शरीर, मन, दिमाग इन सबके लिए नुकसानदायक हो सकता है।

निर्भया गैंग रेप

दिनांक 16 दिसंबर 2012 राजधानी दिल्ली में रात के समय एक चलती बस में ज्योति नाम की लड़की के साथ गैंगरेप की वारदात को 6 जनों द्वारा अंजाम दिया गया, हालांकि इस बात में आज भी कंफ्यूजन है की वारदात को अंजाम देने वाले लड़के 6 थे या उससे कम थे या उससे ज्यादा, क्योंकि लगभग साढे 7 साल बाद उन 4 दोषियों को फांसी दी गई है, जबकि एक नाबालिग होने के कारण 3 साल बाल सुधार गृह में रखने के बाद छोड़ दिया गया था तथा मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राम सिंह ने जेल में आत्महत्या कर ली थी साल 2013 में, हुआ यूं कि उस रात ज्योति अपने दोस्त अविंद्र के साथ रात को मूवी देखने गई थी उसके बाद जब यह दोनों मूवी देख कर बाहर लौटे तो उनके घर जाने के लिए उनको ऑटो नहीं मिला इस दौरान वह एक प्राइवेट बस में बैठे जिसमें पहले से ही सवार कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की, दुष्कर्म किया फिर उनको चलती बस से सड़क किनारे फेंक दिया था, हालांकि पकड़े गए छह दोषियों को सज़ा हो चुकी है किंतु आज भी काफी लोग इस फैसले से नाराज़ हैं  क्योंकि इस केस की जांच पर आज तक भी सवाल उठ रहे हैं, कहा जा रहा है कि यह केस पूरी तरह से मीडिया प्रेशर, पॉलीटिकल प्रेशर एवं पब्लिक प्रेशर में इस केस का नतीजा सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाया गया क्योंकि बहुत से लोग फांसी की सजा से सहमत नहीं  हैं, वहीं कुछ लोग काफी उत्सुक, उत्साहित एवं खुश हैं कि साढे 7 साल बाद निर्भया को एवं उसकी मां आशा देवी को न्याय मिल गया किंतु कुछ लोगों का मानना यह भी है कि पुलिस ने काफी प्रेशर में इस केस की जांच की और पकड़े गए 6 लोगों में से सभी बराबर के दोषी नहीं थे या उनमें से कुछ ही दोषी थे, निर्भया के दोषियों के लिए इस केस में डॉक्टर ए पी सिंह जो कि उनकी वकालत कर रहे थे उन्होंने अपना काफी परिश्रम, अनुभव एवं स्किल  का उपयोग करते हुए उनको बचाने का भरसक प्रयास किया किंतु इतने प्रेशर के होते हुए उन्हें निराशा हाथ लगी।