Sunday, March 29, 2020
निर्भया गैंग रेप
दिनांक 16 दिसंबर 2012 राजधानी दिल्ली में रात के समय एक चलती बस में ज्योति नाम की लड़की के साथ गैंगरेप की वारदात को 6 जनों द्वारा अंजाम दिया गया, हालांकि इस बात में आज भी कंफ्यूजन है की वारदात को अंजाम देने वाले लड़के 6 थे या उससे कम थे या उससे ज्यादा, क्योंकि लगभग साढे 7 साल बाद उन 4 दोषियों को फांसी दी गई है, जबकि एक नाबालिग होने के कारण 3 साल बाल सुधार गृह में रखने के बाद छोड़ दिया गया था तथा मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राम सिंह ने जेल में आत्महत्या कर ली थी साल 2013 में, हुआ यूं कि उस रात ज्योति अपने दोस्त अविंद्र के साथ रात को मूवी देखने गई थी उसके बाद जब यह दोनों मूवी देख कर बाहर लौटे तो उनके घर जाने के लिए उनको ऑटो नहीं मिला इस दौरान वह एक प्राइवेट बस में बैठे जिसमें पहले से ही सवार कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की, दुष्कर्म किया फिर उनको चलती बस से सड़क किनारे फेंक दिया था, हालांकि पकड़े गए छह दोषियों को सज़ा हो चुकी है किंतु आज भी काफी लोग इस फैसले से नाराज़ हैं क्योंकि इस केस की जांच पर आज तक भी सवाल उठ रहे हैं, कहा जा रहा है कि यह केस पूरी तरह से मीडिया प्रेशर, पॉलीटिकल प्रेशर एवं पब्लिक प्रेशर में इस केस का नतीजा सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाया गया क्योंकि बहुत से लोग फांसी की सजा से सहमत नहीं हैं, वहीं कुछ लोग काफी उत्सुक, उत्साहित एवं खुश हैं कि साढे 7 साल बाद निर्भया को एवं उसकी मां आशा देवी को न्याय मिल गया किंतु कुछ लोगों का मानना यह भी है कि पुलिस ने काफी प्रेशर में इस केस की जांच की और पकड़े गए 6 लोगों में से सभी बराबर के दोषी नहीं थे या उनमें से कुछ ही दोषी थे, निर्भया के दोषियों के लिए इस केस में डॉक्टर ए पी सिंह जो कि उनकी वकालत कर रहे थे उन्होंने अपना काफी परिश्रम, अनुभव एवं स्किल का उपयोग करते हुए उनको बचाने का भरसक प्रयास किया किंतु इतने प्रेशर के होते हुए उन्हें निराशा हाथ लगी।
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