आदत कोई वस्तु , भावना, एहसास , नहीं है आदत महज एक क्रिया है जो कि हमारे मन और मस्तिष्क द्वारा दोहराई जाती है और इसके दोहराने का कारण किसी भी आदत से मिलने वाली संतुष्टि है, आदत सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही तरह की हो सकती हैं, कुछ आदतें जबरन बनाई जाती हैं कुछ जाने अनजाने में बन जाती हैं।
आदतों का प्रभाव
हम किसी भी प्रकार की क्रिया को जब अंजाम देते हैं तो उसका कोई ना कोई प्रभाव हमारे मन, मस्तिष्क या शरीर पर अवश्य होता है, सकारात्मक आदतें हमारे मन, मस्तिष्क व शरीर पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं, व नकारात्मक आदतें नकारात्मक प्रभाव छोड़ती है।
आदतों का आचरण
सकारात्मक आदतों का आचरण में पालन हम मन, मस्तिष्क और शरीर की संतुष्टि के लिए तो करते ही हैं कभी कभी इसीलिए भी करते हैं क्योंकि उनके सकारात्मक प्रभाव हमारे लिए उपयोगी हैं। किंतु नकारात्मक आदतों का आचरण हम सिर्फ संतुष्टि प्राप्त करने के लिए करते हैं और किसी भी नकारात्मक आदत द्वारा प्राप्त की गई संतुष्टि क्षणिक ही होती, जबकि सकारात्मक आदतों द्वारा प्राप्त की गई संतुष्टि या लाभ हमारे लिए जीवन भर उपयोगी होता है।
आदतें कैसे बदले?
मस्तिष्क की एकाग्रता, संयम और दृढ़ निश्चय ही हमें सकारात्मक आदत को अपने आचरण में लाने के लिए प्रतिबाधित कर सकता है, जबकि नकारात्मक आदतें बिना अथक प्रयासों के भी हमारे आचरण में कब आ जाती है हमको इसका आभास भी नहीं होता। इसलिए जरूरी ये है कि अपने घर में, ऑफिस में या कहीं भी सुसंगति का ही आचरण कीजिए ऐसा करने से ही सकारात्मक आदतों का अवतरण हो सकेगा, सकारात्मक आदतों से मन मस्तिष्क और शरीर की संतुष्टि, प्रसन्नता व अन्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं जो कि जीवन भर हमारे लिए उपयोगी बने रहेंगे और उनका दुष्प्रभाव हमारे जीवन व व्यक्तित्व पर नहीं पड़ेगा।
बहुत खूब
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